टोक्यो यूनिवर्सिटी की एक टीम का कहना है कि ये हरकतें बच्‍चे के विकास में मदद करती हैं। ऐसा करके बच्‍चों के सेंसरिमोटर सिस्टम (sensorimotor system) के विकास में मदद मिलती है।